हंगामा है क्यों बरसा...ट्रम्प, टैरिफ, ट्रेड, टेंशन और दुनिया...

 


क्या बिगड़ेगा दुनिया का हिसाब किताब? ... हंगामा है क्यों बरसा, थोडीसी जो...(बढाई टैरिफ)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को टैरिफ (Reciprocal Tariff) की घोषणा कर दी और देश दुनिया में आर्थिक भूकंप के झटके लगने शुरु हो गये. उन्होंने कहा की यह कदम आगे चलकर अमेरिका में स्थिर आर्थिक मजबूती लायेगा. ट्रम्प की कार्यकारी आदेश से इन नए लगाये गए टेरिफ प्लान से दुनिया भर में चिंता की लहर दौड़ रही है हालांकि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प के मुताबिक व्यापारी अनबेलेंस को कम किया जा सकता है एवंम अमेरिकन नौकरियां और उत्पादन को सुरक्षा प्रधान करने हेतु भी बेहद जरुरी है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दुनिया के १८५ देशोके लिए नये टैरिफ (Reciprocal Tariff) की घोषणा कर दी.

इमाजिन करे की आपके देश में विदेशी सामान सस्ता मिल रहा है और उसी वस्तु को स्थानीय कंपनी महंगे दाम पर बेच रही है ऐसे में विदेशी माल से मुकाबला करना घरेलू कंपनियों के लिए मुश्किल हो जाता है यहां ही सरकार 'टैरिफ' नाम का एक आर्थिक औजार इस्तेमाल करती है, जो दरअसल एक आयात शुल्क है। यानी जब कोई वस्तु विदेश से आपके देश में आती है, तो उस पर एक्स्ट्रा शुल्क लगाया जाता है, जिससे वो वस्तु महंगी हो जाए और घरेलू उत्पादों को बराबरी का मौका मिल सके.

टैरिफ एक प्रकार का कर (TAX) है जो किसी देश द्वारा इम्पोर्टेड गुड्स पर लगाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य सरकार के लिए राजस्व बढ़ाना और घरेलू कंपनियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना होता है.

डोनाल्ड ट्रंप और टैरिफ कार्ड

अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल, 2025 से कई देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस नीति के तहत, अमेरिका ने उन देशों को रडार पर रखा है जो अमेरिकी सामानों पर ऊंचे टैक्स लगाते हैं. चीन,भारत,  ब्राझिल और यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्र इस के दायरे में हैं. ट्रम्प ने भारत पर 26% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रम्प के जवाबी टैरिफ का वैश्विक प्रभाव पड रहा है. टैरिफ लगने से विदेशी सामान महंगे हो जाते हैं, जिससे लोग स्थानीय उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित होते हैं. यह वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ा सकता है. जवाबी टैरिफ का मूल अर्थ व्यापार में निष्पक्षता देना है.

टैरिफ से किसे नुकसान, किसे फायदा?

टैरिफ का सबसे पहला असर विदेशी वस्तुओं पर पड़ता है. भारतीय सामान अमेरिका में अब पहले के मुकाबले ज्यादा महंगे हो जाएंगे जिससे उनके सेल की घट हो सकती है. इससे अमेरिकी घरेलू कंपनियों को राहत मिलेगी  और उनका बिजनेस बढ़ सकता है.

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है कि अगर विदेशी कंपनियां भी पलटवार करें और अमेरिकी प्रोडक्ट पर टैरिफ लगा दें, तो अमेरिका की निर्यात करने वाली कंपनियां भी घाटे में आ सकती हैं। हालांकि, भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ऐसा नही करना चाहेगी बल्कि अमेरिका से द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTS) करने पर दबाव डालने की संभावना है.

क्या भारत पर इसका असर पड़ सकता है?

जानकार मानते हैं कि भारत के कई औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित होंगे, इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, रत्न-आभूषण, ऑटो पार्ट्स, ऐल्यूमीनियम जैसे क्षेत्रों में बिजनेस करने वाली भारतीय कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

दुनिया में फ़िलहाल जो भी जैसे भी चल रहा है, भारत अपनी भूमिका जाहिर करने में सक्षम है. ट्रम्प साब तो दुनिया में किसी से भी बखेड़ा ले सकते है लेकिन भारत और मोदी सरकार से बीहाइंड दी स्टेज पुरानी यादे अगर ताजा करे तो नोकिया मोबाईल के दो मिलते हात अभीभी ...कभीभी मिल सकते है...मिल रहे है ..लेकिन दुनिया शायद बेखबर है ..


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